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नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

82. एक विशेष पनडुब्बी २


लड़का: “मैं यह देखने के लिये उत्सुक हूँ कि योना के साथ क्या हुआ |”

लड़की: “अगर वह चतुर होता, तो उस ने परमेश्वर की बात मानी होती और उस से दूर भाग जाने का प्रयत्न न करता |”

लड़का: “ना ही उस के कपड़े गीले हुए होते |”

परमेश्वर बचाना चाहता है - इसी लिये योना को नीनवे जाना था |

ऐसे लगा कि जीवन भर की सैर का अंत हुआ | यदि परमेश्वर की इच्छा न होती तो वह न बचाता | परन्तु वह योना को भी बचाना चाहता है | इसी लिये उस ने योना के लिये एक विशेष पनडुब्बी भेजी | एक बहुत बड़ी मछली उस अनइच्छुक गोताखोर के निकट तैरती हुई आई और उसे पूरा निगल गई |

योना ने तीन दिन और तीन रात उस मछली के पेट में बिताये | समुद्र की गहराई में उस का परमेश्वर के पास से भागना समाप्त हुआ | उस ने अत्यन्त निराश हो कर परमेश्वर को पुकारा :

योना: “प्रभु आप ने मुझे समुद्र में फिकवाया | सारी लहरों ने मुझे घेर लिया | मैं ने सोचा कि मैं मर जाऊंगा | परन्तु आप ने मुझे बचाया ! मैं आप का बहुत आभारी हूँ ! अब मैं वही करूँगा जो आप मुझे करने के लिये कहेंगे |”

परमेश्वर हर एक की पुकार सुनता है | जब तुम बर्बाद और निराश हो जाते हो तब वह तुम्हारी पुकार भी सुनता है | उस ने योना की प्रार्थना सुनी और उस मछली को आज्ञा दी कि वह तैरती हुई किनारे तक जाये और उस के अन्दर जो अपाचन किरायेदार है उसे उगल दे |

परमेश्वर बचाना चाहता है इसी लिये उस ने योना से दूसरी बार कहा :

परमेश्वर ने कहा: “योना, नीनवे के महान नगर में जा और जो मैं कहता हूँ उसे वहाँ के लोगों को बता दे |”

योना चला गया | (चलने की आवाज और नगर की आवाजें सड़कों पर गूंज रही थीं)

योना: “सुनो, परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है | चालीस दिन के अन्दर तुम्हारा सुंदर नगर मलवे का ढेर बन जायेगा | यह तुम्हारे पाप का दंड है | क्योंकी तुम झूठे, व्यभिचारी और बेईमान लोग हो | ऐ हत्यारों और चोरो, परमेश्वर सब कुछ देखता है |”

लोगों ने यह वक्तव्य भयभीत होकर सुना | योना के प्रवचन ने सीधे उन के दिलों को झंझोड़ा |

स्री: “वह सच कह रहा है | हम ने परमेश्वर के विरुद्ध पाप किया है | अब हम इस के विषय में क्या करें ?”

राजा का संदेशवाहक: “राजा का यह आदेश है कि कोई भी व्यक्ति न कुछ खाये और न पिये | अपने पापों का पश्चाताप करो और परमेश्वर को पुकारो | हो सकता है कि वह हमारी प्रार्थना सुने | अन्यायी न बनो और नया जीवन शुरू करो |”

कल्पना करो ! इस नगर के १२०,००० वासीयों ने परमेश्वर को पुकारा | प्रोढ और बच्चों ने एक साथ ऐसा किया | उन्हों ने परमेश्वर के बिना अपना जीवन बिताने के लिये पश्चाताप किया |

दिन बीतते गये : ३८, ३९, ४० | परमेश्वर ने उन्हें दंड नहीं दिया |
उस ने उन की पश्चाताप की प्रार्थनायें सुनीं और उन्हें क्षमा किया | क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है ? हर एक ने परमेश्वर को पुकारा और जिस किसी ने ऐसा किया वह बच गया |

काश हमारे गॉव या नगर मे भी ऐसा ही हो जाता ! परमेश्वर बचाना चाहता है | तुम्हें और दूसरे बहुत से लोगों को भी |


लोग: वर्णनकर्ता, दो बच्चे, योना, परमेश्वर, स्त्री, राजा का संदेशवाहक

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

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