STORIES for CHILDREN by Sister Farida

(www.wol-children.net)

Search in "Hindi":

Home -- Hindi -- Perform a PLAY -- 022 (Chariot of fire to heaven 7)

Previous Piece -- Next Piece

नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

22. अग्नि रथ में स्वर्ग को रवानगी ७


क्या तुम्हें एलिय्याह के महान खोज की याद है जिस के विषय में मैं ने कुछ दिन पहले तुम्हें बताया था ? उन का गायब हो जाना एक पहेली बन कर रह गया |

वर्णन करता: एलीशा, तुम उन के घनिष्ट मित्र थे | क्या तुम जानते हो कि एलिय्याह कहाँ हैं ?

एलीशा: “हाँ, मैं जानता हूँ |”

वर्णन करता: ऐसे लगता है कि तुम प्रसन्न हो | मैं यह जानने के लिये उत्सुक हूँ |

एलीशा: “मुझे ठीक तरह से याद है कि जाने से पहले एलिय्याह ने कैसे आपनी चादर उतारी | मैं ने उन के साथ जाने का निर्णय किया | वह न चाहते थे कि मैं उन के साथ जाऊं परन्तु मैं ने उन्हें मुझे रोकने न दिया | रास्ते में हमें कुछ भविष्यवक्ता मिले जिन्हों ने हम से पूछा : ‘क्या तुम जानते हो कि आज का अंतिम दिन है जो एलिय्याह तुम्हारे साथ होंगे ?”

वर्णन करता: जब तुम ने यह सुना तब क्या तुम उदास हुए थे ?

एलीशा: “मैं पहले से ही यह जानता था और उन्हें चुप रहने को कहा | हम पूर्व की ओर आगे बढ़े | जब हम यर्दन पहुँचे, तब हमें कहीं भी कोई पुल दिखाई न दिया | तब एलिय्याह ने आपनी चद्दर पकड़ कर ऐंठ ली और पानी पर मारा | कल्पना करो ! नदी के पानी का बीच में विभाजन हो गया और हम सूखे स्थल पर से चले गये |”

वर्णन करता: क्या यह सच है ?

एलीशा: “जी हाँ, मैं वहाँ था ! मैं परमेश्वर की महानता और शक्ती से चकित हो गया, और यह कि वह निर्बल लोगों से ऐसे आश्चर्यकर्म कराता है |

जैसे जैसे हम चलते जा रहे थे, हम परमेश्वर के विषय में बातें करते रहे | और तब एक शक्तिशाली घट्ना घड़ी | आस्मान से एक आग का रथ और आग के घोड़े उतरे | चकित हो कर मैं देखता रहा कि एलिय्याह इस रथ पर सवार हो कर परमेश्वर के न दिखाई देने वाले स्वर्ग कि ओर चले गये | मैं ने उन्हें पुकारा परन्तु उस के बाद मैं ने उन्हें फिर कभी न देखा | परमेश्वर ने एलिय्याह को इस रीति से स्वर्ग में उठा लिया |”

वर्णन करता: और इसी कारण कोई व्यक्ति उन को खोज न सका | एलीशा, हमारे प्रश्नों के उत्तर देने के लिये, आप का धन्यवाद | पहेली हल हो गई |

साधारणत : यहाँ हमारे जीवन का अंत मृत्यु होती है | परन्तु हमारे लिये यह महत्वपूर्ण नहीं कि हमारे जीवन का अंत कैसे और कहाँ होता है, बल्कि यह कि हमारी मृत्यु के बाद हम कहाँ होंगे |

एलिय्याह परमेश्वर के पास हैं क्योंकि वह परमेश्वर के साथ जीए | पवित्र शास्त्र में एक और स्थान पर यह कहा है : “जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उस के पास जीवन भी नहीं है |” (१ यूहन्ना ५:१२)

अगले ड्रामे में मैं तुम्हें बताऊंगा कि पतरस ने यीशु के साथ अपना जीवन कैसे शुरू किया |


लोग: वर्णन कर्ता, एलीशा

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

www.WoL-Children.net

Page last modified on July 23, 2018, at 02:02 PM | powered by PmWiki (pmwiki-2.2.109)