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च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

157. एस्तेर अपने प्राण खतरे में डालती है २


हामान केवल कुटील प्रकार का व्यक्ति ही न था बल्कि बहुत अभिमानी भी था | फारिस के महान क्षयर्ष राजा ने उसे राज्य में दूसरे स्थान पर अत्यन्त शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में नियुक्त किया था | हर व्यक्ति उस के सामने झुकता और उस को दंडवत करता था | परन्तु मोर्दकै, जो एस्तेर रानी का सौतेला पिता था, ऐसा नहीं करता था | वह कभी उस के सामने नहीं झुका | हामान बहुत क्रोधित हुआ |

हामान: “तु आदेश मानने से इन्कार कर रहा है | तू मेरे सामने झुक क्यों नहीं जाता ?”

मोर्दकै: “कयोंकि मैं यहूदी हूँ और केवल परमेश्वर के सामने झुकता हूँ |”

हामान: “तुझे इस के लिये पछ्ताना होगा !”

हामान का बहुत ही अपमान हुआ और उस के दिल में एक दानवीय युक्ति निर्मान हुई |

हामान: “मैं उसे मार डालूँगा | उस की हत्या करूँगा और केवल उस की ही नहीं बल्कि उन सब यहूदियों की जो फारस के १२७ प्रान्तों में रहते हैं |”

हामान ने राजा से यहूदियों के विषय में बहुत बुरी तरह से बात की और अपने दानवीय युक्ति के लिये बहुत सारे लालच दे कर राजा का मन मोह लिया | तब वह जो चाहता था कर सकता था |

हामान ने अपने तेज गति से दौडने वाले घोड़ों पर संदेश वाहक भेजे | वह सील बंद पत्र ले कर हर नगर को गये | हर जगह उस का भयानक आदेश सुनाया गया |

संदेश वाहक: “राजा के आदेश नुसर, १३ दिसम्बर के दिन, सब यहूदी पुरुष, स्त्री और बच्चे मार डाले जायें | किसी को जीवित न छोडो ! हर एक को मार डालो और उस की संपत्ति ले लो !”

इस आदेश ने बहुत भय और आतंक निर्मान किया | यहूदियों ने मृत्यु शोक का लिबास पहन लिया | वे रोये और उन्होंने परमेश्वर को पुकारा | मोर्दकै ने राज महल में तत्कालीन निवेदन भेजा कयोंकि अब केवल एक ही व्यक्ति, अर्थात उस की सौतेली बेटी, एस्तेर रानी, उन को बचा सकती थी |

मोर्दकै: “एस्तेर, तुम राजा के पास जाओ और उस से निवेदन करो कि वह हमें जीने दे |”

एस्तेर: “मैं यह नहीं कर सकती | किसी को राजा के पास जाने की अनुमति नहीं दी गई है जब तक कि वह स्वय: उसे न बुलाये | यदि मैं चली जाऊँ तो मैं मर सकती हूँ |”

मोर्दकै: “खामोश न रहो ! हो सकता है कि यही कारण है जो तुम आज रानी हो --- ताकि हमें बचा सको |”

एस्तेर: “मेरे लिये प्रार्थना करो | मैं राजा के पास जाऊँगी | यदि मुझे नाश ही होना है तो मुझे यह स्विकार है !”

ठीक एस्तेर की तरह, यीशु ने भी अपने जीवन की बाजी लगाई | आप मरने के लिये तैयार थे ताकि हम बचाये जाते और अनन्त जीवन पाते |

एस्तेर ने अपने अत्यन्त सुन्दर कपड़े पहने | धड़कते हुये दिल के साथ वह सिंहासन के कमरे तक पहुँची | राजा ने उसे आते हुये देखा | क्या वह उसे आने देगा या ...

यह मैं तुम्हें अगले ड्रामे में बताऊंगा |


लोग: वर्णनकर्ता, हामान, मोर्दकै, एस्तेर, संदेश वाहक

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

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