Home
Links
Contact
About us
Impressum
Site Map


YouTube Links
Spotify Links
App Download


WATERS OF LIFE
WoL AUDIO


عربي
Aymara
Azərbaycanca
Bahasa Indones.
বাংলা
Български
Cebuano
Deutsch
Ελληνικά
English
Español-AM
Español-ES
فارسی
Français
Fulfulde
Gjuha shqipe
Guarani
հայերեն
한국어
עברית
हिन्दी
Italiano
Қазақша
Кыргызча
Македонски
Malagasy
മലയാളം
日本語
O‘zbek
Plattdüütsch
Português
پن٘جابی
Quechua
Română
Русский
Schwyzerdütsch
Srpski/Српски
سِنڌِي‎
Slovenščina
Svenska
தமிழ்
Türkçe
Українська
اردو
中文

Home -- Hindi -- Perform a PLAY -- 060 (A different kind of Christmas 2)

Previous Piece -- Next Piece

नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

60. क्रिसमस – कितना अलग २


पहाड़ों पर छोटे गाँव में कोई क्रिस्मस नहीं मनाता था | किसी को प्रसन्नता न थी कि प्रभु यीशु ने जन्म लिया | नन्दा की प्रतिक्रिया अलग थी | उस दिन सुबह गुप्त रूप से उस ने मरियम, यूसुफ और नन्हे यीशु की कहानी अपने भाई को सुनाई थी | वह क्रिस्मस मनाना चाहती थी परन्तु नहीं जानती थी कि वह उसे कैसे मनाये |

मसीही स्कूल में वे लोग क्रिस्मस का पौधा सजाते थे, उपहार देते थे, दिये जलाते थे और गीत गाते थे, परन्तु यहाँ ऐसे नहीं हो रहा था | उस ने अपना एप्रन पहन लिया, रोटी का आटा गूंधा, कुंए में से पानी निकाला और बकरियों का दूध निकाला | आपनी थकी हुई माँ की सहायता करने में नन्दा को आनंद होता था | यह भी क्रिस्मस मनाने का एक मार्ग था | शाम को कई अतिथि आ गये | कई रिश्तेदार भी नन्दा को दोबारा देखना चाहते थे क्योंकि वह केवल स्कूल की छुट्टी में ही घर पर होती थी |

उन्हों ने भूना हुआ खरगोश और चपाती खाई | हर एक ने मज़े लेकर खाया | खाने के बाद, हसन ने अचानक कहा :

हसन: “नन्दा, हमें चरनी में के बालक यीशु की कहानी सुनाओ, जो तुम ने मुझे आज सवेरे सुनाई थी ?”

कमरे में खतरनाक खामोशी छा गई | यीशु के नाम का यहाँ स्वागत न किया जाता था और इसी लिये लोग क्रोध से नन्दा की ओर देखने लगे | उस कीं बहिन, मन्दा ने उस का मजाक उड़ाया |

मन्दा: “क्या उन्हों ने यह तुम्हें स्कूल में सिखाया ? तुम कभी इस विषय में न बोलना !”

नन्दा खामोश रही | उसे अकेला पन महसूस हुआ और ऐसे लगा जैसे उसे अस्विकार किया गया हो | ठीक उसी तरह जैसे यीशु को कई साल पहले महसूस हुआ था | परन्तु जो कुछ भी हुआ, वह आप की ईमान्दार रहना चाहती थी | उस का पिता बोला :

पिता: “अवश्य नन्दा पवित्र शास्त्र में की कहानियों पर विश्वास नहीं रखती | हमारा धर्म अलग है और वह उसे जानती है | यह सच है ना, नन्दा ?”

नन्दा: “परन्तु मैं यीशु पर विश्वास करती हूँ | स्वर्ग में जाने का आप ही एक मात्र मार्ग हैं | यीशु ने कहा : मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ, बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता |” (यूहन्ना १४:६)

इस १३ साल की लड़की की ओर ठंडी ख़ामोशी और काली दृष्टिपात होने लगी | दूसरों ने यीशु को अस्विकार किया यह देख कर नन्दा को दुख : हुआ | वह भाग कर बाहर गई और रोई | वही अकेली थी जो प्रभु यीशु से प्रेम रखती थी | दूसरे आप से प्रेम क्यों नहीं करते ? नन्दा के पास इस का कोई उत्तर न था |

अचानक उस का छोटा भाई उस के पास आ कर खड़ा हो गया |

हसन: “नन्दा, मुझे तुम्हारी कहानियाँ पसंद आती हैं | मैं ठीक तुम्हारी तरह होना चाहता हूँ |”

नन्दा मुस्कुराई | अब वह और भयभीत नहीं हुई | क्रिस्मस की खुशी उस के दिल में आ गई | उस ने क्रिस्मस मनाया - यीशु को अपने दिल में रख कर !


लोग: वर्णनकर्ता, हसन, मन्दा, नन्दा, पिता

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

www.WoL-Children.net

Page last modified on July 23, 2018, at 02:43 PM | powered by PmWiki (pmwiki-2.3.3)