STORIES for CHILDREN by Sister Farida

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Home -- Hindi -- Perform a PLAY -- 026 (A friend betrays Jesus)

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नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

26. एक मित्र यीशु को पकड्वाता है


मित्र या शत्रु ? तुम क्या सोचते हो ?

जल्दी से वह यरूशलेम की सकरी गलियों में से चलता हुआ निकल गया | चिंतित हो कर उस ने पीछे मुड कर देखा और अंत में महायाजक के घर पर पहुँचा | बंद दरवाजों के पीछे योजना बनाई जा रही थी | यह लोग यीशु को मार डालना चाहते थे | किसी ने दरवाज़ा खोला और यीशु के चेले को वहाँ खड़ा देख कर आश्चर्य करने लगा |

एक मित्र शत्रु के पास जाता है - इस का अर्थ क्या होता है ?

यहूदा: “यदि मैं तुम्हें वह स्थान बताऊँ जहाँ तुम यीशु को बंदी बना सकते हो, तो तुम मुझे क्या दोगे ?”

महायाजक: ”हम तुझे चांदी के ३० सिक्के देंगे |”

जल्दी से सौदा किया गया | स्वय : सन्तुष्ट होकर यहूदा राजमहल से चला गया |

अन्त:करण: “यहूदा, तू यीशु का चेला है | तू उन्हें पैसों के कुछ सिक्कों के लिये कैसे पकडवा सकता है ?”

उस के अन्त : करण ने उसे भारी दंड देना चाहिये था | कम से कम, बाहर से, तीन साल तक वह मित्र बना रहा, परन्तु उस का दिल यीशु से बहुत दूर था | और अब वह आप को पकड़वाने के लिये ठीक समय की प्रतिक्षा कर रहा था | परन्तु यीशु हर बात जानते हैं; आप हर व्यक्ति को संपूर्णत : जानते हैं | परन्तु ऐसा होना था |

यीशु जानते थे कि आप को मरना है, और आप ने गतसमनी के बाग़ में प्रार्थना की |

अचानक ज़ोर की आवाज आने लगी | यहूदा और सैनिक मशाल और तलवारें लेकर आ गये |

मित्र या शत्रु ?

यीशु ने एक समय कहा था : “जो मेरे लिये नहीं वह मेरे विरुद्ध है |”

एक चुंबन के साथ, जो मित्रता का चिन्ह है, यहूदा ने अपने प्रभु को पकड़वाया |

बिजली के समान, सैनिक आप पर झपट पड़े और आप को बंदी बना लिया |

उन्हों ने आप के साथ निर्दयत : से व्यवहार किया | उन्हों ने आप को पीटा, कोड़े लगाये और आप के चेहरे पर थूका | तब वे इस निर्दोष को न्यायाधीश के पास घसीट कर ले गये |

झूटे गवाहों ने आप पर दोष लगाया | मंदिर के सेवक चिल्लाये :

मंदिर के सेवक: “तुझे अपने बचाव पक्ष में कुछ नहीं कहना ?”

यीशु चुप रहे और कुछ भी न कहा |

महायाजक: “हमें अभी बता दे – क्या तू परमेश्वर का पुत्र है !”

यीशु: “मैं वही हूँ |”

लोग: “कभी नहीं !”

लोग: “हम उस पर विश्वास नहीं करते !”

लोग: “वह मृत्यु दंड का पात्र है !”

लोग: “उसे ले जाओ !”

लोग: ”उसे मर जान चाहिये !”

वे उस पर विश्वास नहीं करना चाहते थे | और तब ?

अगले ड्रामे में यह कहानी जारी रहेगी |


लोग: वर्णन कर्ता (और अन्त:करण), यहूदा, महायाजक, मंदिर के सेवक, यीशु, लोग

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

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