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Home -- Hindi -- Perform a PLAY -- 073 (Shock in the classroom 1)

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नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

73. कक्षा में धक्का १


छुट्टियाँ समाप्त हो गईं | बहुत बुरा हुआ ! परन्तु स्कूल का नया साल उबा देने वाला न होगा | ओक ट्री स्कूल के विद्यार्थी छोटे छोटे समूह में इकठ्ठे खड़े हो गये | उन के वस्त्र पुराने फैशन के थे, परन्तु उन दिनों में वैसे ही हुआ करते थे | वे डींग मारने में चतुर थे | विशेषत : सुशील | वह जो कहता था, दूसरे विद्यार्थी वैसे ही करते थे |

सुशील: “सुनो ! जब नया शिक्षक आयेगा और एक महान व्यक्ति की तरह करने लगे, तो इस का अर्थ यह होगा कि वह कुछ ही दिनों का अतिथि
है | हम ने तीन शिक्षकों को पहले ही भगा दिया है और यह भी ज्यादा समय तक न टिके गा |”

स्कूल की पहली लड़की: “हमें कोई नियंत्रण में नहीं कर सकता, यधपि हम इतने आज्ञाकारी हैं और सीखना चाहते हैं |” (सब खिलखिला कर हँसते हैं)

स्कूल की दूसरी लड़की: “वह देखो, वह आ रहा है | जल्दी से कक्षा में चलो |”

स्कूल की पहली लड़की: “यह हमारे स्कूल में कैसे आ पाया ?”

स्कूल की दूसरी लड़की: “प्रिन्सिपाल ने कहा कि परमेश्वर ने उसे यहाँ भेजा है |”

सुशील: “और हम उसे चले जाने पर मजबूर करेंगे |” (सब हँसते हैं)

(स्कूल के घंटे की आवाज)

स्कूल का घंटा बजा | सुशील और उस के मित्र पिछली पंक्ति में बैठ गये | कुतूहल के साथ वे प्रतिक्षा कर रहे थे कि अब क्या होगा | शिक्षक कक्षा में आ गये | जब उन्हों ने कक्षा में चारों तरफ देखा तब वह प्रसन्न दिखाई दिये |

शिक्षक: “लडको और लड़कियों, तुम को नमस्कार | इस साल हम एक दूसरे के साथ मिल जुल कर आगे बढ़ना चाहते हैं | यदि हम चाहते हैं कि स्कूल का यह साल अच्छा रहे तो हमें आज ही से अच्छी शुरुआत करनी होगी | कृपया खड़े हो जाओ | हम प्रार्थना करेंगे |”

प्रार्थना ? विद्यार्थी खामोश हो गये | सुशील को ऐसा झटका लगा कि वह आपो आप खड़ा हो गया और अपने हाथ जोड़े |

शिक्षक: “प्रभु यीशु, इस साल हमें मिल कर काम करने और मिल जुल कर रहने में सहायता कीजिये | हर विद्यार्थी के लिये मैं आप को धन्यवाद देता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि उन में से हर एक आप को जाने गा क्योंकि आप हर एक से प्रेम करते हैं | आमीन |”

विद्यार्थी इस प्रार्थना का अर्थ न समझ सके | शिक्षक की प्रार्थना उन के दिलों में प्रवेश कर गई | शिक्षक चाहते थे कि वे यीशु को जानें क्योंकि यीशु उन से प्रेम करते थे | उन्हों ने ऐसी प्रार्थना इस से पहले कभी न सुनी थी | उन के पास इस विषय में सोचने के लिये अधिक समय भी न था | वे मुश्किल से पहले झटके से निकल आये थे कि दूसरा झटका लगा | अगले ड्रामे में मैं तुम्हें बताऊंगा कि आगे क्या हुआ |


लोग: वर्णनकर्ता, सुशिल, स्कूल कि दो लड़कियां, शिक्षक

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

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