STORIES for CHILDREN by Sister Farida

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Home -- Hindi -- Perform a PLAY -- 065 (Missing for three days)

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नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

65. तीन दिन से गायब


(मार्ग में यात्रियों कीआवाज)

पहला यात्री: “मैं यह उत्सव जल्दी नहीं भूलूँगा |”

दूसरा यात्री: “वह आश्चर्यजनक था |”

पहला यात्री: “यह हमारा विशेष अधिकार है | हमारा परमेश्वर वह है जिस ने हमें मुक्त किया है | अगले साल मैं फिर यरूशलेम को जाऊंगा |”

मरियम: “तुम्हें शांति मिले | क्या तुम ने हमारे पुत्र को देखा है ?”

यूसुफ: “वह खो गया है और १२ साल का है |”

दूसरा यात्री: “संभवत : वह दूसरे लोगों के साथ आगे निकल गया हो |”

मरियम और यूसुफ यीशु को ढ़ूँडते रहे | वह पहली बार उन के साथ यरूशलेम आया था | घर लौटते समय वह अचानक गायब हो गया था |

मरियम: “यूसुफ, मुझे उस की चिता लगी है |”

यूसुफ: “हमें वापस लौट कर उसे शहर में ढ़ूँडना चाहिये |”

वह हर जगह अपने १२ वर्षिय पुत्र के विषय में पूछते रहे | किसी ने यीशु को देखा न था | तीन दिन के बाद उन्हों ने उसे मन्दिर में पाया | उन्हें आश्चर्य हुआ क्योंकि वह परमेश्वर के घर में था और पवित्र शास्त्र के शिक्षकों के साथ उस के विषय में विचार विनमय कर रहा था | वे उस के प्रश्नों और उत्तरों पर आश्चर्य कर रहे थे |

मरियम: “तुम यहाँ क्यों रहे ? हम ने तुम्हें हर जगह ढ़ूँडा और हमें तुम्हारी चिंता लगी थी |”

यीशु: “तुम मुझे क्यों ढ़ूँड रही थीं ? क्या तुम नहीं जानती थीं कि मैं अपने पिता के घर में रहूँगा ?”

पहली बार यीशु ने परमेश्वर को अपना पिता कहा और इस तरह से स्वय : अपने आप का परिचय परमेश्वर के पुत्र के तौर पर किया |

और परमेश्वर के पुत्र, यीशु, एक समय तुम्हारी तरह बालक थे | आप पूर्णत : मानव थे | आप तुम्हारी तरह ही हँसे और रोये | जिस प्रकार तुम खाते और सोते हो वैसे ही आप भी करते थे | आप को सीखना पड़ा, ठीक तुम्हारी तरह | आप ने तुम्हारी तरह ही हमेशा अपने माता पिता की आज्ञा का पालन किया | मैं तुम्हें हँसते हुए सुन रहा हूँ ! क्या तुम हमेशा अपने माता पिता का आदर नहीं करते ?

पवित्र शास्त्र में लिखा है : बच्चो, अपने माता पिता का आदर करो | यीशु हमेशा आज्ञा का पालन करते थे | आप ने कभी कोई बुरी बात न कही और न ही बुरा काम किया | आप ने कभी झूट नहीं बोला, न चोरी की | आप निष्पाप थे | आज्ञा का पालन करने से आप को आनंद होता था | इसी लिये आप मरियम और यूसुफ के साथ नासरत लौट आये |

यदि तुम यीशु की आज्ञा का पालन करना चाहते हो तो आप तुम्हें अपने उदाहरण का अनुसरण करने में सहायता करेंगे | आप से बिन्ती कीजिये तो आप तुम्हारे सभी अवज्ञाओं को क्षमा करेंगे |

जब तुम आप के साथ जीना चाहोगे तब आप तुम्हें ऐसा जीवन बिताना सिखायेंगे जो परमेश्वर को पसंद हो |

जब यीशु तुम्हारे दिल में वास करते हैं तब कचरा फेकना, बरतन धोना, या बरतन की धुलाई का पानी फेंकना जैसे काम करने में भी मज़ा आता
है |

यीशु के साथ जीने का प्रयत्न करना अच्छी बात है |


लोग: वर्णनकर्ता, दो यात्री, मरियम, यूसुफ़, यीशु

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

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