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Home -- Hindi -- Perform a PLAY -- 040 (The little sailing boat)

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नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

40. एक छोटी सी नाव


अंत में छुट्टियाँ आ गईं | जगदीश इस की बहुत दिनों से अपेक्षा कर रहा था | वह सोना चाहता था और अपना शौक पूरा करने के लिये अधिक समय चाहता था |

उत्साह पूर्वक वह कई दिनों तक श्रम कर के एक नाव बनाता रहा | उसे अपने पिता के कारखाने में भी जाने की अनुमति दी गई थी | अंत में उस ने उस नाव को लाल और नीला रंग लगाया और तीनों मस्तूलों पर सफ़ेद नौकापाल लगाये | गर्व पूर्वक वह आपनी छोटी नाव के साथ समुद्र के किनारे पर गया और उसे लहरों में धकेल दिया | उस ने यह न देखा कि लड़कों का एक समुह यह देख रहा था और वे उस के निकट आ गये |

लड़का: “क्या यह तुम ने स्वय : बना ली है ? हम उसे ले कर तैरायेंगे |”

इस से पहले कि जगदीश एक शब्द कहता, उसे झाडी में धकेला गया | जब तक कि वह उठ खड़ा हुआ वह टोली चली गई और उस की नाव भी |

वह रोने पर आ गया और अपने घर की ओर चल पड़ा |

पिता: “मैं तुम्हारे लिये नई नाव खरीदूंगा |”

जगदीश: “परन्तु पिताजी, मैं वही नाव प्राप्त करना चाहूँगा जिसे मैं ने स्वय: बनाया था |”

सप्ताह गुजर गये | एक दिन जगदीश ने एक दूकान की खिडकी में एक नाव देखी |

जगदीश: “पिताजी, वह मेरी नाव है !”

पिता: “क्या तुम निसंदेह जानते हो कि वह तुम्हारी नाव है ?”

जगदीश: “जी हाँ, मुझे बिलकुल संदेह नहीं | क्या तुम उस के अगले भाग पर वह चिन्ह नहीं देखते ?”

जगदीश दौड़ते हुए दूकान में विक्रेता महीला के पास गया :

जगदीश: “यह नाव तुम्हारी नहीं है | वह मेरी है |”

जगदीश के पिता ने उस चकित स्त्री को सब कुछ समझा दिया | जब उस का कहना समाप्त हुआ, तब उस ने कहा :

विक्रेता स्त्री: “मैं ने यह नाव लड़कों के समोह से खरीदी | मैं सौदा करुँगी: मैं यह नाव तुम्हें उसी राशि में बेचुंगी जिस में मैं ने उसे लिया था |”

जगदीश राज़ी हो गया और उसी नाव की कीमत अदा की जिसे उस ने स्वय: बनाया था | घर लौटते समय उस ने कहा :

जगदीश: “ऐ छोटी सी नाव, अब तू दो बार मेरी हो गई है | पहले जब मैं ने तुझे बनाया और दूसरे जब मैं ने तुझे ख़रीदा |”

पिता: “क्या तुम परमेश्वर के भी दो बार हो चुके हो ?”

जगदीश: “दो बार क्यों ?”

पिता: “इस लिये कि परमेश्वर ने मनुष्य को बनाया, परन्तु मनुष्य، पाप के कारण، परमेश्वर से दूर चला गया | जब यीशु ने क्रूस पर अपने प्राण दे दिये, तब आप ने अपने जीवन से कीमत चुकाई ताकि हम दोबारा परमेश्वर के हो जायें |”

जगदीश: “मैं कैसे जान सकता हूँ कि मैं दो बार परमेश्वर का हो चुका हूँ ?”

पिता: “तुम्हारे पाप क्षमा करने के लिये यीशु से बिन्ती करो, आप से आग्रह करो कि आप तुम्हारे जीवन में आयें और तब तुम परमेश्वर की सन्तान बन जाओगे | परमेश्वर की सन्तान होने से तुम दोबारा उस के हो जाते हो |”


लोग: वर्णन कर्ता, लड़का, जगदीश, पिता, विक्रेता स्त्री

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

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