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नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
बच्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक
39. पथराव करना और मुकुट पहननापांचवी कक्षा के बच्चे अच्छी शिक्षा पा चुके थे और राष्ट्रिय खेल स्पर्धा की अपेक्षा कर रहे थे | हर एक ने अपना अपना कर्तव्य ठीक से पूरा किया था | और अंतिम समारोह के समय तुम उन बच्चों के तेजस्वी चहरे देख सकते थे जिन्हें पुरस्कार मिला था | शिव विजेता की तरह दौड़ा | कल्पना कीजिये यदि उस ने अच्छी शुरुआत की होती, तेजी से दौड़ा होता, दूसरे सभी दौड़ने वालों से आगे निकल गया होता और समाप्ती की रेखा से पहले बाजू की रेखाओं पर बैठ गया होता और हार मान ली होती | यह सोचा भी नहीं जा सकता | जो अच्छी शुरुआत करता है वह ठीक तौर से दौड़े और गति जारी रखे | यह नियम हर उस व्यक्ति पर लागु होता है जो यीशु के साथ जीता है | विश्वास में यह महत्वपूर्ण है कि जीवन यीशु के साथ शुरू किया जाये परन्तु वह इस पर निर्भर करता है कि हम कैसे दौड़ते हैं और उस में डटे रहते हैं | यीशु हमारी सहायता करते हैं और मैं देख रहा हूँ कि आप ने स्तिफनुस के साथ यह कैसे किया | कई लोग चाहते थे कि वह विश्वास न लाये | हम पवित्र शास्त्र में पढ़ते हैं कि यह लोग आये और विवाद करने लगे | परन्तु स्तिफनुस ने उस में भाग न लिया | और इस के कारण हर व्यक्ति पागल हो गया | उन्हों ने स्तिफनुस के विषय में जो परमेश्वर पर विश्वास रखता था और गरीबों की सहायता करता था, हर तरफ क्ररूप झूट फैलाया | स्तिफनुस को न्यायालय में भी पेश होना पड़ा | सरकारी वकील: “स्तिफनुस ने परमेश्वर का अपमान किया और कानून के विरुद्ध बातें कहीं |” न्यायाधीश: “क्या यह आरोप सच है ?” हर व्यक्ति स्तिफनुस की ओर घूरने लगा | उस का चहरा स्वर्गदूत के समान चमकने लगा | अपना बचाव करने की बजाय उस ने उन्हें यीशु के विषय में बताना शुरू किया | स्तिफनुस: “परमेश्वर का पुत्र दुनिया में आया | तुम ने उसे क्रूस पर चढ़ा दिया परन्तु परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया |” न्यायालय में भी स्तिफनुस प्रभु यीशु का निष्ठावान रहा | तब उस ने आस्मान की ओर देखा और कहा : स्तिफनुस: “मैं स्वर्ग को खुला हुआ, और यीशु को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़ा देखता हूँ |” यह शब्द सुन कर क्रोधित भीड़ उस पर झपट पड़ी | उन्हों ने उसे पीटा, नगर के बाहर घसीट कर ले गये और उस पर पथराव किया | स्तिफनुस, यीशु पर अपने विश्वास पर बना रहा | उन्हों ने उसके मरने तक उस पर पथराव किया | मरने से पहले उस ने प्रार्थना की : स्तिफनुस: “प्रभु यीशु, मैं आप के पास स्वर्ग में आ रहा हूँ : उन्हें उन के पाप क्षमा कीजिये |” उद्धेश प्राप्त करने का मार्ग कठीन था | परन्तु स्तिफनुस निष्ठावान रहा | और उस के लिये यीशु ने उसे महिमायुक्त मुकुट अर्पण किया | यीशु पर विश्वास करने और निष्ठावान रहने का परिणाम हमेशा अच्छा होता है, क्योंकि कठिनाई, ईर्षा और घ्रणा, अंतिम शब्द नहीं हैं | अच्छा परिणाम अभी आने का है | लोग: वर्णन कर्ता, सरकारी वकील, न्यायाधीश, स्तिफनुस © कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी |