Home
Links
Contact
About us
Impressum
Site Map


YouTube Links
Spotify Links
App Download


WATERS OF LIFE
WoL AUDIO


عربي
Aymara
Azərbaycanca
Bahasa Indones.
বাংলা
Български
Cebuano
Deutsch
Ελληνικά
English
Español-AM
Español-ES
فارسی
Français
Fulfulde
Gjuha shqipe
Guarani
հայերեն
한국어
עברית
हिन्दी
Italiano
Қазақша
Кыргызча
Македонски
Malagasy
മലയാളം
日本語
O‘zbek
Plattdüütsch
Português
پن٘جابی
Quechua
Română
Русский
Schwyzerdütsch
Srpski/Српски
سِنڌِي‎
Slovenščina
Svenska
தமிழ்
Türkçe
Українська
اردو
中文

Home -- Hindi -- Perform a PLAY -- 045 (The catastrophe 4)

Previous Piece -- Next Piece

नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

45. नाश ४


हेती में तूफ़ान आया | इस गरीब देश में भयंकर तूफ़ान ने फसल का बार बार नाश किया था | जैसे ही जादूगर, गौतम वर्षा के अँधेरे में पहाड़ पर चढ़ गया, उस ने लम्बी साँस ली | बिजली ने अँधेरे में उजाला किया | उस ने चट्टान पर विजय को पहचाना |

गौतम: “मैं उसे मार डालूँगा | वह हर बात के लिये अपराधी है क्योंकि वह हमेशा यीशु के विषय में बोलता है | आत्मायें इस तूफान के द्वारा हमारे पास लौट आई हैं | मैं उसे मार डालूँगा और हर कोई सोचेगा कि वह चट्टान पर से गिर गया |”

हत्या के विचार अपने दिल में लिये हुए गौतम परिश्रम करते हुए आगे बढ़ा | परन्तु अचानक वह एक बहुत बडे गड़े में गिर गया और उस के पाँव में मोच आ गई | वह अपना काम जारी न रख सका |

गौतम: “सहायता करो ! सहायता करो !”

गरज के बावजूद, विजय ने उस की सहायता के लिये पुकारें सुनीं | वह नहीं जानता था कि गौतम जादूगर उस का पीछा क्यों कर रहा था |

गौतम: “मेरी सहायता करो | मैं आपनी बड़ी बेटी से मिलना चाहता हूँ जो इस पहाड़ पर रहती है |”

गौतम बड़ा झूटा है | परन्तु विजय ने किसी तरह से तो भी उस की सहायता की | सावधानी से वह उस जख्मी व्यक्ति को एक झोपडी मे ले गया जिस में वे वर्षा से सुरक्षित रहे | एक धीमी आवाज़ ने उन्हें सुनने पर मजबूर किया | वह गरज न थी | और वह रुकी नहीं बल्कि और भी जोरदार हुई | पहाड़ थरथराया | बडे बडे चट्टान के टुकड़े खाई में गिर गये और गाँव को ढ़ाँक दिया | गौतम भयभीत हुआ |

गौतम: “मेरी पत्नी, मेरी तारा ! हमें उन की सहायता करनी चाहिये |”

विजय: “गौतम, तुम ने मेरी बात क्यों नहीं सुनी ? मैं ने तुम्हें कीचड के खसकने के विषय में चेतावनी दी थी ! अगर तुम्हारी पत्नी और बेटी मर जायेंगे तो तुम जिम्मेदार होंगे |”

कष्ट के साथ और विजय की सहायता से, गौतम अपने आप को उस जगह तक घसीट कर ले गया जहाँ एक समय उस का घर खड़ा था | वह उस मिट्टी को बेतहाशा खोदने लगा | फिर वह रुका |

गौतम: “मेरी पत्नी मर गई है | परन्तु उधर देखो - कुछ हिल रहा है ! तारा !”

विजय: “प्रभु यीशु, हमारी सहायता कीजिये | मिशनरियों को भोजन और दवायें ले कर हमारे पास भेज दीजिये |”

यीशु ने विजय की प्रार्थना का उत्तर दिया | थोड़ी ही देर में सहायता आ पहुंची और तारा को हेलिकॉप्टर में मिशन अस्पताल मे ले जाया गया |

अगर तुम अगला ड्रामा सुनोगे तो जान लोगे कि उस के साथ वहाँ क्या हुआ |


लोग: वर्णनकर्ता, गौतम, विजय

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

www.WoL-Children.net

Page last modified on July 09, 2018, at 02:33 PM | powered by PmWiki (pmwiki-2.3.3)