STORIES for CHILDREN by Sister Farida

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नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

110. केवल आठ वर्ष का और राजा बना


(शोर गुल की आवाज) राजा अमोन के विरुद्ध विद्रोह |

उस के नाम का अर्थ वफादार और भरोसा करने योग्य होता है | परन्तु वह वैसा न था | विशेषता परमेश्वर के संबंध में ऐसा न था | वह उन कला कृतियों की पूजा करता था जो लकड़ी और पत्थर से बनाई जाती थीं | मुर्ती पूजा परमेश्वर का भयंकर अपमान करने जैसा होता है |

सेवक: “हम उसे मारने वाले हैं | वह अपने कमरे में है |”

(दरवाजा खुलने की आवाज, शोर गुल चींखना चिल्लाना)

राजा अमोन की उसी के सेवकों ने हत्या की | और उस का पुत्र नया राजा बना |

क्या तुम ने योशिय्याह के बारे में सुना है ? वह आठ वर्ष का ही था कि राजा बना |

क्या वह अपने पिता की तरह ही परमेश्वर का अपमान करेगा ? या उस ने परमेश्वर से प्रेम किया ?

पवित्र शास्त्र में उस के जीवन का वर्णन अत्यन्त आश्चर्यजनक रूप में किया गया है | योशिय्याह ने वही किया जो परमेश्वर को पसन्द था | क्या तुम्हारा वर्णन भी ऐसा ही हो सकता है ? तुम्हारे जीवन का भी यही उद्देश होना चाहिये क्योंकी यीशु हमारे वह सब काम क्षमा करते हैं जो परमेश्वर को पसन्द नहीं होते | तुम आप से क्षमा करने के लिये बिन्ती कर सकते हो | आप तुम्हारी प्रार्थना सुनेंगे |

योशिय्याह परमेश्वर से प्रेम करता था और जब वह बड़ा हो गया तब उस ने सारे देश में की सब प्रतिमायें नष्ट कर डालीं | हर वह वस्तु जो परमेश्वर को अपमानित करती थी, नष्ट कर दी गई |

क्या तुम भी अपने जीवन की वस्तुयें साफ न करोगे ? गंदे व्हीडियो और पत्रिकायें ? अपनी खाट के नीचे की और कोठरी में की वस्तुयें जो परमेश्वर को अपमानित करती हैं ?

योशिय्याह: “जरा मन्दिर की ओर देखो | परमेश्वर का घर गोदाम के समान दिखाई देता है | यह हमारे परमेश्वर का अपमान है | निर्मान का सामान खरीदो और काम शुरू करो ! (निर्मान कार्य की आवाज)

याजक: “देखो ،मुझे अभी क्या मिला | पिछले कोने में यह हस्तलिखित किताबें मिलीं | चलो हमें इन्हें राजा योशिय्याह के पास ले जाना चाहिये |”

परमेश्वर का वचन, पवित्र शास्त्र, कोने में पड़ा हुआ था | इस में कोई आश्चर्य नहीं जो उन के जीवन में परमेश्वर को प्रथम स्थान नहीं दिया गया |

याजक: “राजा योशिय्याह, हम ने यह हस्तलिखित किताबें कचरे में पायीं |”

राजा योशिय्याह: “उन्हें ऊंची आवाज में पढ़ो |”

राजा ने सुना कि परमेश्वर ने उन लोगों के साथ क्या किया जो उस से अपने पूरे दिल से प्रेम नहीं करते थे | भयभीत हो कर वह जमीन पर बैठ गया और रोने लगा | उस के लोगों ने परमेश्वर को इतना अधिक अपमानित किया यह सुन कर उसे बहुत दुःख हुआ |

इस के कुछ समय बाद, परमेश्वर ने उस से कहा :

परमेश्वर: “मैं इस नगर को दंड दे रहा हूँ | परन्तु मैं तुझे हानी नहीं पहुंचाऊंगा क्योंकि तु मुझ से प्रेम करता है |”

राजा योशिय्याह ने बच्चों और युवकों को एक सेवा के लिये नेवता दिया और उन्हें आदेश दिया कि वे परमेश्वर से प्रेम करें और उसे अपने जीवन में प्रथम स्थान दें |

क्या तुम ने यह नेवता स्विकार किया होता ?


लोग: वर्णनकर्ता, सेवक, योशिय्याह, याजक, परमेश्वर की आवाज

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

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