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Home -- Hindi -- Perform a PLAY -- 093 (The Kurku-Promise 5)

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नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

93. कुरकु-वचन ५


बहुत प्रसन्न हो कर रिंगु भागते हुए गाँव में गया |

रिंगु: “बाघ मर गया है ! बाघ मर गया है ! हम ने उसे मार डाला !”

बत्तू अपने बडे भाई पर गर्व कर रहा था |

बत्तू: “तुम आश्चर्य में डालते हो | बाघ का शिकार करते समय क्या तुम डर गये थे ?”

रिंगु: “बहुत डर गया था | परन्तु मैं ने प्रार्थना की और उस के बाद मेरा दिल तेज़ी से नहीं धड़का |”

(मोटर की आवाज)

रिंगु: “वह निश्चित गोरे परदेसी, साहिब ग्रब होंगे, जिन्हों ने मुझे यीशु के विषय में बताया |”

बत्तू: “चलो, हम दौड़ते हुए उन के पास चलें |”

यह दो भारती लड़के अगले मोड पर गायब हो गये और तब वहाँ गड़बड़ देखी | मिशनरी की जीप कीचड में फस गई थी | रिंगु को अपने सांडों को जोतना पड़ा ताकि वह जीप को कीचड में से खींच निकालते |

साहिब ग्रब: “निकल गई | रिंगु, सहायता के लिये तुम्हारा धन्यवाद | आज मुझे तुम्हें अलविदा कहना होगा | इस के बाद एक लम्बे समय तक हम एक दूसरे को देख न पायेंगे | हमेशा याद रखो कि प्रभु यीशु हमेशा तुम्हारे साथ हैं | अप्प के आज्ञाकारी रहो और हमेशा वही करो जो आप को पसंद हो | पाप तुम्हें अनंदित नहीं करता | क्या परमेश्वर की ओर से दी हुई पत्रिका अब तक तुम्हारे पास है ?”

रिंगु: “जी हाँ | मैं उसे यहाँ, अपनी पगड़ी में रखता हूँ |”

साहिब ग्रब: “परमेश्वर का वचन अपने दिल में रखो | तुम उस पर निर्भर रह सकते हो | ओह, मुझे याद आया, मेरा वाद्ययंत्र खो गया है |”

रिंगु का चहरा लाल हो गया | वह उस ने चुराया था | उस ने वह वाध्ययंत्र अपने पुराने छप्पर में रखा था | क्या साहिब को इस की जानकारी थी ?

साहिब ग्रब: “मेरे पास उसे ढ़ूँड़ने के लिये समय नहीं है | क्या तुम मेरे लिये यह कर सकोगे ? अगर वह तुम्हें मिल जाये तो कृपया उसे शहर में श्रीमती मरियम के पास लाना | वह हमेशा जानती हैं कि मैं कौन सी जगह प्रवचन दे रहा हूँ और वह उसे मेरे पास लायेंगी |”

रिंगु ने अपने हाथ आहिस्ता से उठाये और अपने कान पकड़ लिये | भारती व्यक्ति कोई वादा, इसी प्रकार करता है | असली कुर्क वादा ऐसा ही किया जाता है |

परेशान हो कर वह घर चला गया |

रिंगु: “मैं ने यह क्यों नहीं कहा कि उसे मैं ने चुराया है ? मैं डरपोक हूँ | प्रभु यीशु, क्या आप अभी भी मुझे सुन सकते हैं ? मैं ने कुछ चुराया है | मुझे खेद है | कृपया मेरा पाप क्षमा कीजिये और जो कुछ ठीक है वह करने में मेरी सहायता कीजिये |”

ऐसी परिस्तिथी में क्या किया जाये जो ठीक हो ? रिंगु को तुरन्त पता चला | उसे वह वस्तु लौटानी थी जिसे उस ने चुराया था | परन्तु ऐसा करना कठिन था | दूसरे लोग उस के विषय में

क्या सोचेंगे ? उस ने अपने दिल में एक धीमी आवाज सुनी | उस ने उस से कहा : वाधयंत्र वापस ले जाओ और फिर से परिस्तिथी सुलझा लो |

क्या तुम भी इस अवाज को जानते हो ? क्या तुम जानते हो कि कोई वस्तु चुराने के बाद परिस्तिथी कैसे सुलझाई जाती है ? इस का उत्तर अगले ड्रामे में होगा |


लोग: वर्णनकर्ता, रिंगु, बत्तू, साहिब ग्रब

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

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