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Home -- Hindi -- Perform a PLAY -- 049 (The good Shepherd)

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नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

49. अच्छा चरवाहा


कुछ समय पहले मैं राज मार्ग पर कार चला रहा था | मैं ने सुन्दर फिलीस्तीनी वन्य भूमि, अंगूर के बाग़ और खेत देखे और उस के बाद भेड़ों के एक झुंड को ढूँड निकाला |

क्या तुम जानते हो कि भेड़ें केवल अपने चरवाहे की आवाज़ पहचानती है और किसी और की आवाज़ नहीं सुनतीं ?

क्या तुम जानते हो कि भेड़ें बहुत जल्द थक जाती हैं और वे अपना बचाव नहीं कर सकतीं ?

क्या तुम जानते हो कि भेड़ें दिशा नहीं पहचान सकतीं ? उदाहरणत: वे कुत्तों और घोड़ों कि तरह अपने घर का मार्ग नहीं ढूँड सकतीं | भेड़ों को चरवाहे कि अत्यन्त आवयश्कता होती है जो उन का मार्गदर्शन, सुरक्षा, और चिन्ता करे | और हमें भी इस की आवयश्कता है |

जब भी मैं भेड़ों को देखता हूँ, मुझे यीशु का यह वचन याद आता है |

यीशु: “अच्छा चरवाहा मैं हूँ | मेरी भेड़ें मेरी आवाज सुनती हैं और वे मेरे पीछे चलती हैं |”

आप अच्छे चरवाहे हैं और हम भेड़ें हैं |

यीशु ने उन के विषय में एक बार एक कहानी सुनाई थी |

(पुष्ट भूमि में भेड़ों की आवाज)

यीशु: “एक चरवाहे के पास १०० भेड़ें थीं | वह उन्हें हरी चरागाहों और ताजे पानी की ओर ले जाता था | जब जंगली जानवर आ जाते तो वह तुरन्त खतरे को देख कर झूंड की रक्षा करता था |जब भेड़ें चरवाहे के निकट रहती थीं तो सुरक्षित रहती थीं | वे ठीक परस्तिथी में रहती थीं | शाम को वह चरवाहा उन्हें घर ले जाता और यह जानने के लिये कि वे सब वापस आ चुकी हैं, उन की गिन्ती करता था: ९७, ९८, ९९ | केवल ९९ ? एक भेड कम थी | वह अपने मार्ग पर गई और खो गई | असहाय और थकी हुई, वह सहायता के लिये चिल्लाई | याद रखो : भेड़ें, चरवाहे के बिना खो जाती हैं | परन्तु चरवाहे ने उस की अनुपस्तिथी को जान लिया और उसे उस समय तक ढूँडता रहा जब तक कि उसे झाडियों में पाया | अनंदित हो कर उस ने उस भेड़ को अपने कंधे पर रखा और घर ले गया | अब वह भेड़ सुरक्षित थी |
चरवाहे ने अपने मित्रों से कहा : मेरे साथ आनंद करो क्योंकि मैं ने अपनी खोई हुई भेड़ पाई है |”

यह एक भेड़ उस के लिये महत्वपूर्ण थी | उस ने उसे ढूंडा और उसे पाया | और वह उस से प्रेम करता था |

यीशु अच्छे चरवाहे हैं |

क्या तुम आप की आवाज पहचानते हो ? क्या तुम आप के अनुयायी हो ?

यीशु के साथ तुम सुरक्षित रहते हो | आप हमें हमारी आवयश्कता के अनुसार वस्तुएँ देते हैं | आप हमेशा हमारे साथ रहते हैं और जब हमें कठिनाई पेश आती है तब हमें अकेला नहीं छोड़ते | इस के बावजूद कई लोग आप से दूर चले जाते हैं और स्वय : अपने मार्ग पर चलने लगते हैं |

क्या तुम कल्पना कर सकते हो वह ऐसा क्यों करते हैं ?


लोग: वर्णनकर्ता, यीशु

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

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Page last modified on July 23, 2018, at 02:33 PM | powered by PmWiki (pmwiki-2.3.3)