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Home -- Hindi -- Perform a PLAY -- 112 (Mirrors tell the truth)

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नाटक -- अन्य बच्चों के लिए अभिनीत करो !
च्चों द्वारा अभिनय करने के लिए नाटक

112. सत्य का आईना


आज तुम ने कितनी बार आईने में दखा है ?

मार्क ने आईने में देखा | वह चकित हुआ | परन्तु साबुन और पानी का प्रयोग करने के बदले उस ने आईना उठाया और क्रोध में उसे जमीन पर पटक दिया | (काँच के टूटने की आवाज)

इसी तरह, कुछ लोग पवित्र शास्त्र के साथ भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं | वह एक आईना है जो बच्चों और बड़ों को बताता है कि उन के जीवन में क्या ठीक नहीं है परन्तु कई लोगों को यह पसन्द नहीं आता |

कई साल पहले यिर्मयाह एक भविष्यवक्ता था और साथ ही साथ ईस्राएल में परमेश्वर की ओर से बोला करता था | उसे भी यही अनुभव हुआ | उस के प्रवचन देश के लिये आईने के समान थे परन्तु वे बदलना नहीं चाहते थे | परमेश्वर ने उन के साथ बहुत संयम से काम लिया, लग भाग ५० साल के लम्बे समय तक |

परमेश्वर की आवाज: “यिर्मयाह, एक पुस्तक ले लो और मैं जो कहता हूँ उसे उस में लिखो | तब कदाचित लोग मेरी बात सुनेंगे और अपन जीवन बदल लेंगे |”

यह कार्य पूरा होने को महीने लगे | यिर्मयाह ने परमेश्वर का वचन अपने सचिव को सुनाया जिस ने हर शब्द लिख दिया |

यिर्मयाह: “बरुक, किसी तरह हम ने यह काम पूरा किया | तुम जानते हो कि मुझे अब मन्दिर में जाने की अनुमति नहीं है | तुम वहाँ जाओ और यह हस्तलिखित पुस्तकें अपने साथ ले जाओ |”

जब यह हस्तलिखित पुस्तकें ऊँची आवाज में पढ़ी जा रही थीं तब मीकायाह सुन रहा था | उस ने तुरन्त अपने मंत्री को राजा के महल में ढूंड निकला |

मीकायाह: “बारुक ने परमेश्वर का वचन मन्दिर में पढ़ा | हम वैसे नहीं जी रहे जैसे हमें जीना चाहिये | परमेश्वर हमें दंड देने वाला है |”

मंत्री: “जिस मनुष्य के पास हस्तलिखित पुस्तकें हैं उसे हमारे पास ले आओ |”

बारुक आ गया | परमेश्वर का वचन मंत्री के लिये आईने के समान था |

मंत्री: “बारुक, तुम ने यह सब कैसे लिखा ?”

बारुक: “यिर्मयाह उसे मुझे सुनाता गया और मैं ने उसे सियाही से लिखा |”

मंत्री: “हमें यह समाचार राजा को पहुँचाना चाहिये | बारुक, तुम यिर्मयाह के साथ छिप जाओ; कोई व्यक्ति यह न जाने कि तुम दोनों कहाँ रहते
हो |”

राजा यहोयाकिम अपने जाड़े के घर में अंगेठी के सामने आराम से बैठा था |

उस के जीवन में कई ऐसी बातें थीं जो ठीक नहीं थीं | परन्तु वह परमेश्वर की बात सुनना ही न चाहता था | जब भी कुछ अनुच्छेद पढ़े जाते थे, तब वह खड़ा हो जाता, चाकू हाथ में लेता और पुस्तक का कुछ भाग काट कर उसे आग में फ़ेंक देता था | वह यह बार बार करता रहा यहाँ तक कि पूरी पुस्तक जला दि गई |

छिपने के स्थान पर हर वचन फिर एक बार लिखा गया |

परमेश्वर का प्रेम महान है | उस ने अपना वचन हमारे लिये भी लिखवाया |

तुम्हारे लिये मेरा यह सुझाव है : पवित्र शास्त्र हर रोज पढ़ा करो और तुम में परिवर्तन आ जाने दो |

परमेश्वर चाहता है कि तुम अच्छे बनो, विशेषत: तुम्हारे दिल में |


लोग: वर्णनकर्ता, यिर्मयाह, परमेश्वर की आवाज, मंत्री, बारुक, मीकायाह

© कॉपीराईट: सी इ एफ जरमनी

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Page last modified on July 31, 2018, at 08:42 AM | powered by PmWiki (pmwiki-2.3.3)